अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिरहवंत भगवंतहि देखी। नारद मन भा सोच बिसेषी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभगवान्को विरहयुक्त देखकर नारदजीके मनमें विशेषरूपसे सोच हुआ। [उन्होंने विचार किया कि] मेरे ही शापको स्वीकार करके श्रीरामजी नाना प्रकारके दु:खोंका भार सह रहे हैं (दु:ख उठा रहे हैं)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 673 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बिरहवंत भगवंतहि देखी। नारद मन भा सोच बिसेषी।।
मोर साप करि अंगीकारा। सहत राम नाना दुख भारा।।
स्रोत अभिलेख 3.41 · पुस्तक पृ. 673, 674
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बिरहवंत भगवंतहि देखी। नारद मन भा सोच बिसेषी।।
English explanation
Seeing Lord Rama afflicted by separation, Narada felt deep concern.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिरहवंत | विरह से व्याकुल | afflicted by separation |
| भगवंतहि | भगवान राम को | Lord Rama |
| देखी | देखकर | having seen |
| नारद | देवर्षि नारद के | of the divine sage Narada |
| मन | मन में | in the mind |
| भा | हुई | arose |
| सोच | चिंता | concern |
| बिसेषी | विशेष, गहरी | deep |
2 मोर साप करि अंगीकारा। सहत राम नाना दुख भारा।।
English explanation
Narada thought: Accepting my curse, Rama is enduring many grievous sorrows.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोर | मेरा | my |
| साप | शाप | curse |
| करि | करके | having made |
| अंगीकारा | स्वीकार | acceptance |
| सहत | सह रहे हैं | is enduring |
| राम | राम | Rama |
| नाना | अनेक प्रकार के | many kinds of |
| दुख | दुःख | sorrows |
| भारा | भारी | grievous |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.41
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 673
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 673, 674
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।