अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तहँ पुनि सकल देव मुनि आए। अस्तुति करि निज धाम सिधाए।।
मूल पाठ
तहँ पुनि सकल देव मुनि आए। अस्तुति करि निज धाम सिधाए।।
बैठे परम प्रसन्न कृपाला। कहत अनुज सन कथा रसाला।।
स्रोत अभिलेख 3.41 · पुस्तक पृ. 673, 674
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर वहाँ सब देवता और मुनि आये और स्तुति करके अपने-अपने धामको चले गये। कृपालु श्रीरामजी परम प्रसन्न बैठे हुए छोटे भाई लक्ष्मणजीसे रसीली कथाएँ कह रहे हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 673 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तहँ पुनि सकल देव मुनि आए। अस्तुति करि निज धाम सिधाए।।
English explanation
Then all the gods and sages came there; after offering praise, they departed for their own abodes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तहँ | वहाँ | there |
| पुनि | फिर | then |
| सकल | सभी | all |
| देव | देवता | gods |
| मुनि | मुनि | sages |
| आए | आए | came |
| अस्तुति | स्तुति | praise |
| करि | करके | having offered |
| निज | अपने-अपने | their own |
| धाम | धाम | abodes |
| सिधाए | चले गए | departed |
2 बैठे परम प्रसन्न कृपाला। कहत अनुज सन कथा रसाला।।
English explanation
The compassionate Rama sat greatly pleased, telling delightful stories to his younger brother Lakshmana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बैठे | बैठे थे | sat |
| परम | अत्यंत | greatly |
| प्रसन्न | प्रसन्न | pleased |
| कृपाला | कृपालु राम | the compassionate Rama |
| कहत | कह रहे थे | were telling |
| अनुज | छोटे भाई लक्ष्मण | younger brother Lakshmana |
| सन | से | to |
| कथा | कथा | stories |
| रसाला | रसपूर्ण | delightful |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.41
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 673
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 673, 674
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।