अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ऐसे प्रभुहि बिलोकउँ जाई। पुनि न बनिहि अस अवसरु आई।।
मूल पाठ
ऐसे प्रभुहि बिलोकउँ जाई। पुनि न बनिहि अस अवसरु आई।।
यह बिचारि नारद कर बीना। गए जहाँ प्रभु सुख आसीना।।
स्रोत अभिलेख 3.41 · पुस्तक पृ. 673, 674
भावार्थ
मूल पाठ के बादऐसे (भक्तवत्सल) प्रभुको जाकर देखूँ। फिर ऐसा अवसर न बन आवेगा। यह विचारकर नारदजी हाथमें वीणा लिये हुए वहाँ गये, जहाँ प्रभु सुखपूर्वक बैठे हुए थे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 674 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 ऐसे प्रभुहि बिलोकउँ जाई। पुनि न बनिहि अस अवसरु आई।।
English explanation
Let me go and behold such a Lord; an opportunity like this will not come about again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ऐसे | ऐसे | such |
| प्रभुहि | प्रभु को | the Lord |
| बिलोकउँ | मैं दर्शन करूँ | let me behold |
| जाई | जाकर | having gone |
| पुनि | फिर | again |
| न | नहीं | not |
| बनिहि | बनेगा, प्राप्त होगा | will come about |
| अस | ऐसा | such |
| अवसरु | अवसर | opportunity |
| आई | आकर | having come |
2 यह बिचारि नारद कर बीना। गए जहाँ प्रभु सुख आसीना।।
English explanation
Thinking this, Narada went with a lute in hand to where the Lord was seated at ease.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह | this |
| बिचारि | विचार करके | having considered |
| नारद | देवर्षि नारद | the divine sage Narada |
| कर | हाथ में | in hand |
| बीना | वीणा | lute |
| गए | गए | went |
| जहाँ | जहाँ | where |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| सुख | सुखपूर्वक | at ease |
| आसीना | बैठे थे | was seated |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.41
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 674
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 673, 674
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।