अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गावत राम चरित मृदु बानी। प्रेम सहित बहु भाँति बखानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवे कोमल वाणीसे प्रेमके साथ बहुत प्रकारसे बखान-बखानकर रामचरितका गान कर [ते हुए चले आ] रहे थे। दण्डवत् करते देखकर श्रीरामचन्द्रजीने नारदजीको उठा लिया और बहुत देरतक हृदयसे लगाये रखा॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 674 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
गावत राम चरित मृदु बानी। प्रेम सहित बहु भाँति बखानी।।
करत दंडवत लिए उठाई। राखे बहुत बार उर लाई।।
स्रोत अभिलेख 3.41 · पुस्तक पृ. 673, 674
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 गावत राम चरित मृदु बानी। प्रेम सहित बहु भाँति बखानी।।
English explanation
Narada sang Rama’s deeds in a gentle voice, lovingly recounting them in many ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गावत | गाते हुए | singing |
| राम | राम के | Rama’s |
| चरित | चरित्र, कार्य | deeds |
| मृदु | कोमल, मधुर | gentle |
| बानी | वाणी में | in a voice |
| प्रेम | प्रेम | love |
| सहित | के साथ | with |
| बहु | अनेक | many |
| भाँति | प्रकार से | ways |
| बखानी | वर्णन करते हुए | recounting |
2 करत दंडवत लिए उठाई। राखे बहुत बार उर लाई।।
English explanation
As Narada prostrated, Rama lifted him up and repeatedly held him to his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करत | करते हुए | while performing |
| दंडवत | दंडवत प्रणाम | full prostration |
| लिए | उन्हें ले लिया | took him |
| उठाई | उठाकर | lifting him up |
| राखे | उन्हें रखा | held him |
| बहुत | बहुत | many |
| बार | बार | times |
| उर | हृदय से | to his heart |
| लाई | लगाकर | drawing him close |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.41
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 674
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 673, 674
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।