अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिरति बिबेक बिनय बिग्याना। बोध जथारथ बेद पुराना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतथा वैराग्य, विवेक, विनय, विज्ञान (परमात्माके तत्त्वका ज्ञान) और वेद-पुराणका यथार्थ ज्ञान रहता है। वे दम्भ, अभिमान और मद कभी नहीं करते और भूलकर भी कुमार्गपर पैर नहीं रखते॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 678 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बिरति बिबेक बिनय बिग्याना। बोध जथारथ बेद पुराना।।
दंभ मान मद करहिं न काऊ। भूलि न देहिं कुमारग पाऊ।।
स्रोत अभिलेख 3.46 · पुस्तक पृ. 678, 679
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिरति बिबेक बिनय बिग्याना। बोध जथारथ बेद पुराना।।
English explanation
They possess detachment, discernment, humility, and realized knowledge, together with a true understanding of the Vedas and Puranas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिरति | वैराग्य; आसक्ति से निवृत्ति | detachment from worldly attachment |
| बिबेक | विवेक; उचित-अनुचित की पहचान | discernment of right and wrong |
| बिनय | विनय; नम्रता | humility |
| बिग्याना | अनुभूत या गहरा ज्ञान | realized or deep knowledge |
| बोध | समझ; बोध | understanding |
| जथारथ | यथार्थ; सही | true; accurate |
| बेद | वेदों का | of the Vedas |
| पुराना | पुराणों का | of the Puranas |
2 दंभ मान मद करहिं न काऊ। भूलि न देहिं कुमारग पाऊ।।
English explanation
They never indulge in hypocrisy, conceit, or arrogance, and do not set foot on an evil path even inadvertently.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दंभ | दंभ; धार्मिक या नैतिक दिखावा | hypocrisy; pretension |
| मान | अहंकार; अपने बड़प्पन का भाव | conceit; self-importance |
| मद | मद; घमंड | arrogance |
| करहिं | करते हैं | practice; indulge in |
| न | नहीं | not |
| काऊ | कभी भी | ever |
| भूलि | भूलकर भी | even inadvertently |
| न | नहीं | not |
| देहिं | रखते हैं | place; set |
| कुमारग | बुरे मार्ग पर | on an evil path |
| पाऊ | पैर | foot |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.46
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 678
- सहायक विषय
- संतोंके लक्षण और सत्संग-भजनके लिये प्रेरणा
- मुद्रित पृष्ठ
- 678, 679
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।