अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जप तप ब्रत दम संजम नेमा। गुरु गोबिंद बिप्र पद प्रेमा।।
मूल पाठ
जप तप ब्रत दम संजम नेमा। गुरु गोबिंद बिप्र पद प्रेमा।।
श्रद्धा छमा मयत्री दाया। मुदिता मम पद प्रीति अमाया।।
स्रोत अभिलेख 3.46 · पुस्तक पृ. 678, 679
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे जप, तप, व्रत, दम, संयम और नियममें रत रहते हैं और गुरु, गोविन्द तथा ब्राह्मणोंके चरणोंमें प्रेम रखते हैं। उनमें श्रद्धा, क्षमा, मैत्री, दया, मुदिता (प्रसन्नता) और मेरे चरणोंमें निष्कपट प्रेम होता है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 678 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जप तप ब्रत दम संजम नेमा। गुरु गोबिंद बिप्र पद प्रेमा।।
English explanation
They practice recitation, austerity, vows, sense-restraint, self-discipline, and observances, and cherish the feet of the teacher, God, and Brahmins.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जप | मंत्र या नाम का बार-बार स्मरण | repetition of a sacred name or mantra |
| तप | तपस्या | austerity |
| ब्रत | व्रत; धार्मिक संकल्प | religious vows |
| दम | इंद्रियों का निग्रह | restraint of the senses |
| संजम | संयम; आत्म-अनुशासन | self-discipline |
| नेमा | नियमित धार्मिक आचरण | regular religious observances |
| गुरु | आध्यात्मिक गुरु | spiritual teacher |
| गोबिंद | गोविंद; भगवान | God, called Govinda |
| बिप्र | ब्राह्मण | Brahmins |
| पद | चरणों में | at the feet of |
| प्रेमा | प्रेम | love |
2 श्रद्धा छमा मयत्री दाया। मुदिता मम पद प्रीति अमाया।।
English explanation
They have faith, forgiveness, friendliness, compassion, joy in others’ happiness, and guileless love for my feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रद्धा | श्रद्धा; आस्था | faith; reverent trust |
| छमा | क्षमा | forgiveness |
| मयत्री | मैत्री; मित्रभाव | friendliness |
| दाया | दया; करुणा | compassion |
| मुदिता | दूसरों के सुख में प्रसन्नता | joy in others’ happiness |
| मम | मेरे | my |
| पद | चरणों में | at the feet |
| प्रीति | प्रेम | love |
| अमाया | कपट या छल से रहित | free of guile |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.46
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 678
- सहायक विषय
- संतोंके लक्षण और सत्संग-भजनके लिये प्रेरणा
- मुद्रित पृष्ठ
- 678, 679
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।