अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निज गुन श्रवन सुनत सकुचाहीं। पर गुन सुनत अधिक हरषाहीं।।
मूल पाठ
निज गुन श्रवन सुनत सकुचाहीं। पर गुन सुनत अधिक हरषाहीं।।
सम सीतल नहिं त्यागहिं नीती। सरल सुभाउ सबहिं सन प्रीती।।
स्रोत अभिलेख 3.46 · पुस्तक पृ. 678, 679
भावार्थ
मूल पाठ के बादकानोंसे अपने गुण सुननेमें सकुचाते हैं, दूसरोंके गुण सुननेसे विशेष हॢषत होते हैं। सम और शीतल हैं, न्यायका कभी त्याग नहीं करते। सरलस्वभाव होते हैं और सभीसे प्रेम रखते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 678 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 निज गुन श्रवन सुनत सकुचाहीं। पर गुन सुनत अधिक हरषाहीं।।
English explanation
AI draft: Saints feel shy on hearing their own virtues praised, and rejoice still more on hearing the virtues of others.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपने | their own |
| गुन | गुण | virtues |
| श्रवन | कानों से | with their ears |
| सुनत | सुनते हुए | on hearing |
| सकुचाहीं | संकोच करते हैं | feel shy |
| पर | दूसरों के | of others |
| गुन | गुण | virtues |
| सुनत | सुनते हुए | on hearing |
| अधिक | अधिक | more |
| हरषाहीं | प्रसन्न होते हैं | rejoice |
2 सम सीतल नहिं त्यागहिं नीती। सरल सुभाउ सबहिं सन प्रीती।।
English explanation
They are even-minded and calm, never abandon right conduct, are simple in nature, and love everyone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सम | समभाव वाले | even-minded |
| सीतल | शांत और शीतल स्वभाव वाले | calm and gentle |
| नहिं | नहीं | not |
| त्यागहिं | छोड़ते हैं | abandon |
| नीती | नीति; उचित आचरण | right conduct |
| सरल | सरल; निष्कपट | simple; guileless |
| सुभाउ | स्वभाव | nature |
| सबहिं | सभी के | everyone |
| सन | साथ; से | with; toward |
| प्रीती | प्रेम | love |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.46
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 678
- सहायक विषय
- संतोंके लक्षण और सत्संग-भजनके लिये प्रेरणा
- मुद्रित पृष्ठ
- 678, 679
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।