अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गावहिं सुनहिं सदा मम लीला। हेतु रहित परहित रत सीला।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसदा मेरी लीलाओंको गाते-सुनते हैं और बिना ही कारण दूसरोंके हितमें लगे रहनेवाले होते हैं। हे मुनि! सुनो, संतोंके जितने गुण हैं, उनको सरस्वती और वेद भी नहीं कह सकते॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 678 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
गावहिं सुनहिं सदा मम लीला। हेतु रहित परहित रत सीला।।
मुनि सुनु साधुन्ह के गुन जेते। कहि न सकहिं सारद श्रुति तेते।।
स्रोत अभिलेख 3.46 · पुस्तक पृ. 678, 679
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 गावहिं सुनहिं सदा मम लीला। हेतु रहित परहित रत सीला।।
English explanation
They always sing and hear of my deeds; their nature is to remain devoted to others’ welfare without selfish motives.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गावहिं | गाते हैं | sing |
| सुनहिं | सुनते हैं | listen to |
| सदा | सदा | always |
| मम | मेरी | my |
| लीला | लीलाएँ; दिव्य चरित | divine deeds |
| हेतु | स्वार्थपूर्ण उद्देश्य | selfish motive |
| रहित | से रहित | without |
| परहित | दूसरों की भलाई में | in others’ welfare |
| रत | लगे हुए | devoted; engaged |
| सीला | स्वभाव वाले | having such a disposition |
2 मुनि सुनु साधुन्ह के गुन जेते। कहि न सकहिं सारद श्रुति तेते।।
English explanation
Listen, sage: neither Saraswati nor the Vedas can describe all the virtues that saints possess.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | हे मुनि नारद | O sage Narada |
| सुनु | सुनो | listen |
| साधुन्ह | साधुओं | saints |
| के | के | of |
| गुन | गुण | virtues |
| जेते | जितने | as many as |
| कहि | कह; वर्णन कर | describe |
| न | नहीं | not |
| सकहिं | सकते हैं | can |
| सारद | सरस्वती, वाणी की देवी | Saraswati, goddess of speech |
| श्रुति | वेद | the Vedas |
| तेते | उतने; उन सबको | that many; all of them |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.46
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 678
- सहायक विषय
- संतोंके लक्षण और सत्संग-भजनके लिये प्रेरणा
- मुद्रित पृष्ठ
- 678, 679
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।