अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिकसे सरसिज नाना रंगा। मधुर मुखर गुंजत बहु भृंगा।।
मूल पाठ
बिकसे सरसिज नाना रंगा। मधुर मुखर गुंजत बहु भृंगा।।
बोलत जलकुक्कुट कलहंसा। प्रभु बिलोकि जनु करत प्रसंसा।।
स्रोत अभिलेख 3.4 · पुस्तक पृ. 672, 673
भावार्थ
मूल पाठ के बादउसमें रंग-बिरंगे कमल खिले हुए हैं। बहुत-से भौंरे मधुर स्वरसे गुंजार कर रहे हैं। जलके मुर्गे और राजहंस बोल रहे हैं, मानो प्रभुको देखकर उनकी प्रशंसा कर रहे हों॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 672 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बिकसे सरसिज नाना रंगा। मधुर मुखर गुंजत बहु भृंगा।।
English explanation
Lotuses of many colors are blooming, and numerous bees are buzzing in sweet, resonant tones.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिकसे | खिले हैं | have blossomed |
| सरसिज | कमल | lotuses |
| नाना | अनेक प्रकार के | of many kinds |
| रंगा | रंगों वाले | colored |
| मधुर | मीठे स्वर में | sweetly |
| मुखर | मुखर स्वर में | resonantly |
| गुंजत | गूँज रहे हैं | are buzzing |
| बहु | बहुत से | numerous |
| भृंगा | भौंरे | bees |
2 बोलत जलकुक्कुट कलहंसा। प्रभु बिलोकि जनु करत प्रसंसा।।
English explanation
Waterhens and sweet-voiced swans are calling, as though praising Lord Rama on seeing him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बोलत | बोल रहे हैं | are calling |
| जलकुक्कुट | जलमुर्गे | waterhens |
| कलहंसा | मधुर स्वर वाले हंस | sweet-voiced swans |
| प्रभु | प्रभु राम को | Lord Rama |
| बिलोकि | देखकर | having seen |
| जनु | मानो | as though |
| करत | कर रहे हैं | are offering |
| प्रसंसा | प्रशंसा | praise |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 672
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 672, 673
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।