अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चक्रवाक बक खग समुदाई। देखत बनइ बरनि नहिं जाई।।
मूल पाठ
चक्रवाक बक खग समुदाई। देखत बनइ बरनि नहिं जाई।।
सुन्दर खग गन गिरा सुहाई। जात पथिक जनु लेत बोलाई।।
स्रोत अभिलेख 3.4 · पुस्तक पृ. 672, 673
भावार्थ
मूल पाठ के बादचक्रवाक, बगुले आदि पक्षियोंका समुदाय देखते ही बनता है, उनका वर्णन नहीं किया जा सकता। सुन्दर पक्षियोंकी बोली बड़ी सुहावनी लगती है, मानो [रास्तेमें] जाते हुए पथिकको बुलाये लेती हो॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 672 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 चक्रवाक बक खग समुदाई। देखत बनइ बरनि नहिं जाई।।
English explanation
The beauty of the ruddy shelducks, herons, and flocks of birds can only be beheld; it cannot be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चक्रवाक | चकवे | ruddy shelducks |
| बक | बगुले | herons |
| खग | पक्षियों के | of birds |
| समुदाई | समूह | flocks |
| देखत | देखना ही | beholding alone |
| बनइ | संभव है | is possible |
| बरनि | वर्णन किया | described |
| नहिं | नहीं | not |
| जाई | जा सकता | can be |
2 सुन्दर खग गन गिरा सुहाई। जात पथिक जनु लेत बोलाई।।
English explanation
The voices of the beautiful flocks of birds are pleasing, as though they were calling passing travelers to them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुन्दर | सुंदर | beautiful |
| खग | पक्षियों के | of birds |
| गन | समूह | flocks |
| गिरा | वाणी | voices |
| सुहाई | सुहावनी | pleasing |
| जात | जाते हुए | passing |
| पथिक | यात्रियों को | travelers |
| जनु | मानो | as though |
| लेत | लेते हैं | draw to themselves |
| बोलाई | पुकारकर | by calling |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 672
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 672, 673
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।