अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रौढ़ भएँ तेहि सुत पर माता। प्रीति करइ नहिं पाछिलि बाता।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसयाना हो जानेपर उस पुत्रपर माता प्रेम तो करती है, परन्तु पिछली बात नहीं रहती (अर्थात् मातृपरायण शिशुकी तरह फिर उसको बचानेकी चिन्ता नहीं करती; क्योंकि वह मातापर निर्भर न कर अपनी रक्षा आप करने लगता है)। ज्ञानी मेरे प्रौढ़ (सयाने) पुत्रके समान है और [तुम्हारे- जैसा] अपने बलका मान न करनेवाला सेवक मेरे शिशु पुत्रके समान है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 676 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
प्रौढ़ भएँ तेहि सुत पर माता। प्रीति करइ नहिं पाछिलि बाता।।
मोरे प्रौढ़ तनय सम ग्यानी। बालक सुत सम दास अमानी।।
स्रोत अभिलेख 3.43 · पुस्तक पृ. 675, 676
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रौढ़ भएँ तेहि सुत पर माता। प्रीति करइ नहिं पाछिलि बाता।।
English explanation
When that son grows up, his mother does not express her love in the same manner as in his childhood.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रौढ़ | बड़ा और परिपक्व | grown and mature |
| भएँ | हो जाने पर | upon becoming |
| तेहि | उस | that |
| सुत | पुत्र | son |
| पर | के प्रति | toward |
| माता | माता | the mother |
| प्रीति | प्रेम | love |
| करइ | करती है | shows |
| नहिं | नहीं | not |
| पाछिलि | पहले की | the former |
| बाता | रीति से | in that manner |
2 मोरे प्रौढ़ तनय सम ग्यानी। बालक सुत सम दास अमानी।।
English explanation
The spiritually knowledgeable are like my grown sons, while humble servants are like young children.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोरे | मेरे | my |
| प्रौढ़ | बड़े | grown |
| तनय | पुत्र | son |
| सम | के समान | like |
| ग्यानी | आत्मज्ञान वाले | those with spiritual knowledge |
| बालक | छोटे बच्चे | young child |
| सुत | पुत्र | son |
| सम | के समान | like |
| दास | भक्त सेवक | devoted servants |
| अमानी | अहंकाररहित | free of pride |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.43
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 676
- सहायक विषय
- नारद-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 675, 676
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।