अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रेम मगन मुख बचन न आवा। पुनि पुनि पद सरोज सिर नावा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवे प्रेममें मग्र हो गयीं, मुखसे वचन नहीं निकलता। बार-बार चरण-कमलोंमें सिर नवा रही हैं। फिर उन्होंने जल लेकर आदरपूर्वक दोनों भाइयोंके चरण धोये और फिर उन्हें सुन्दर आसनोंपर बैठाया॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 666 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
प्रेम मगन मुख बचन न आवा। पुनि पुनि पद सरोज सिर नावा।।
सादर जल लै चरन पखारे। पुनि सुंदर आसन बैठारे।।
स्रोत अभिलेख 3.34 · पुस्तक पृ. 666, 666
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 प्रेम मगन मुख बचन न आवा। पुनि पुनि पद सरोज सिर नावा।।
English explanation
Absorbed in love, Shabari could utter no words; she repeatedly bowed her head at their lotus feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रेम | प्रेम में | in love |
| मगन | मग्न | absorbed |
| मुख | मुख से | from her mouth |
| बचन | शब्द | words |
| न | नहीं | not |
| आवा | निकले | came forth |
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| पद | चरण | feet |
| सरोज | कमल जैसे | lotus-like |
| सिर | सिर | head |
| नावा | झुकाया | bowed |
2 सादर जल लै चरन पखारे। पुनि सुंदर आसन बैठारे।।
English explanation
Respectfully bringing water, she washed their feet and then seated them on a fine seat.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| जल | जल | water |
| लै | लेकर | having brought |
| चरन | चरण | their feet |
| पखारे | धोए | washed |
| पुनि | फिर | then |
| सुंदर | सुंदर | fine |
| आसन | आसन पर | on a seat |
| बैठारे | बैठाया | seated them |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.34
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 666
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 666, 666
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।