अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाना बाहन नानाकारा। नानायुध धर घोर अपारा।।
मूल पाठ
नाना बाहन नानाकारा। नानायुध धर घोर अपारा।।
सुपनखा आगें करि लीनी। असुभ रूप श्रुति नासा हीनी।।
स्रोत अभिलेख 3.18 · पुस्तक पृ. 643, 644
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे अनेकों प्रकारकी सवारियोंपर चढ़े हुए तथा अनेकों आकार (सूरतों) के हैं। वे अपार हैं और अनेकों प्रकारके असंख्य भयानक हथियार धारण किये हुए हैं। उन्होंने नाक-कान कटी हुई अमङ्गलरूपिणी शूर्पणखाको आगे कर लिया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 643 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 नाना बाहन नानाकारा। नानायुध धर घोर अपारा।।
English explanation
They rode varied mounts, had diverse forms, bore many kinds of weapons, and were terrifying and countless.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाना | अनेक प्रकार के | various |
| बाहन | वाहन या सवारियाँ | vehicles or mounts |
| नानाकारा | विविध आकारों वाले | of diverse forms |
| नानायुध | अनेक प्रकार के आयुध | varied weapons |
| धर | धारण करने वाले | bearing |
| घोर | भयानक | terrifying |
| अपारा | असंख्य | countless |
2 सुपनखा आगें करि लीनी। असुभ रूप श्रुति नासा हीनी।।
English explanation
They placed Shurpanakha in front, her appearance inauspicious and her ears and nose gone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुपनखा | शूर्पणखा, राक्षसी | Shurpanakha, the demoness |
| आगें | आगे | in front |
| करि | करके | placing |
| लीनी | ले लिया | took |
| असुभ | अशुभ | inauspicious |
| रूप | रूप वाली | in appearance |
| श्रुति | कान | ears |
| नासा | नाक | nose |
| हीनी | रहित | deprived of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 643
- सहायक विषय
- शूर्पणखाकी कथा, शूर्पणखाका खर-दूषणके पास जाना और खर-दूषणादिका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 643, 644
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।