अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दुरबासा मोहि दीन्ही सापा। प्रभु पद पेखि मिटा सो पापा।।
मूल पाठ
दुरबासा मोहि दीन्ही सापा। प्रभु पद पेखि मिटा सो पापा।।
सुनु गंधर्ब कहउँ मै तोही। मोहि न सोहाइ ब्रह्मकुल द्रोही।।
स्रोत अभिलेख 3.33 · पुस्तक पृ. 665, 665
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[वह बोला—] दुर्वासाजीने मुझे शाप दिया था। अब प्रभुके चरणोंको देखनेसे वह पाप मिट गया। [श्रीरामजीने कहा—] हे गन्धर्व! सुनो, मैं तुम्हें कहता हूँ, ब्राह्मणकुलसे द्रोह करनेवाला मुझे नहीं सुहाता॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 665 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 दुरबासा मोहि दीन्ही सापा। प्रभु पद पेखि मिटा सो पापा।।
English explanation
Durvasa had cursed me. Upon beholding the Lord’s feet, that sin was removed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दुरबासा | ऋषि दुर्वासा ने | the sage Durvasa |
| मोहि | मुझे | to me |
| दीन्ही | दिया | gave; bestowed |
| सापा | शाप | a curse |
| प्रभु | प्रभु राम के | of Lord Rama |
| पद | चरण | feet |
| पेखि | देखकर | upon beholding |
| मिटा | मिट गया | was removed |
| सो | वह | that |
| पापा | पाप | sin |
2 सुनु गंधर्ब कहउँ मै तोही। मोहि न सोहाइ ब्रह्मकुल द्रोही।।
English explanation
Listen, Gandharva, I tell you: one who is hostile to the Brahmin community does not please me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| गंधर्ब | हे गंधर्व; शापमुक्त कबंध | O Gandharva; Kabandha freed from his curse |
| कहउँ | कहता हूँ | I say; I tell |
| मै | मैं; राम | I; Rama |
| तोही | तुमसे; तुम्हें | to you |
| मोहि | मुझे | to me |
| न | नहीं | not |
| सोहाइ | भाता है; अच्छा लगता है | pleases; is agreeable |
| ब्रह्मकुल | ब्राह्मण कुल के प्रति | toward the Brahmin community |
| द्रोही | द्रोह करने वाला; शत्रुता रखने वाला | one who acts with hostility |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.33
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 665
- सहायक विषय
- कबन्ध-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 665, 665
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