अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
थोरेहि महँ सब कहउँ बुझाई। सुनहु तात मति मन चित लाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द(श्रीरामजीने कहा—) हे तात! मैं थोड़ेहीमें सब समझाकर कहे देता हूँ। तुम मन, चित्त और बुद्धि लगाकर सुनो। मैं और मेरा, तू और तेरा—यही माया है, जिसने समस्त जीवोंको वशमें कर रखा है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 639 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
थोरेहि महँ सब कहउँ बुझाई। सुनहु तात मति मन चित लाई।।
मैं अरु मोर तोर तैं माया। जेहिं बस कीन्हे जीव निकाया।।
स्रोत अभिलेख 3.15 · पुस्तक पृ. 639, 640
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 थोरेहि महँ सब कहउँ बुझाई। सुनहु तात मति मन चित लाई।।
English explanation
AI-generated draft: I will explain everything briefly. Dear Lakshmana, listen with your intellect, mind, and attention fully engaged.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| थोरेहि | थोड़े ही शब्दों | just a few words |
| महँ | में | in |
| सब | सब कुछ | everything |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I tell |
| बुझाई | समझाकर | with explanation |
| सुनहु | सुनो | listen |
| तात | हे प्रिय लक्ष्मण | dear Lakshmana |
| मति | बुद्धि | intellect |
| मन | मन | mind |
| चित | चित्त; ध्यान | attention; consciousness |
| लाई | लगाकर | applying; engaging |
2 मैं अरु मोर तोर तैं माया। जेहिं बस कीन्हे जीव निकाया।।
English explanation
The distinctions of ‘I’ and ‘mine,’ ‘yours’ and ‘you,’ are maya, which has brought all beings under its sway.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | ‘मैं’ का भाव | the sense of ‘I’ |
| अरु | और | and |
| मोर | ‘मेरा’ का भाव | the sense of ‘mine’ |
| तोर | ‘तेरा’ का भाव | the sense of ‘yours’ |
| तैं | ‘तू’ का भाव | the sense of ‘you’ |
| माया | माया; भेद उत्पन्न करने वाली शक्ति | maya, the power producing distinctions |
| जेहिं | जिसने | which |
| बस | वश में | under its sway |
| कीन्हे | कर लिए हैं | has brought |
| जीव | जीवों के | of living beings |
| निकाया | समूह | multitudes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 639
- सहायक विषय
- पञ्चवटी-निवास और श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 639, 640
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।