अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गो गोचर जहँ लगि मन जाई। सो सब माया जानेहु भाई।।
मूल पाठ
गो गोचर जहँ लगि मन जाई। सो सब माया जानेहु भाई।।
तेहि कर भेद सुनहु तुम्ह सोऊ। बिद्या अपर अबिद्या दोऊ।।
स्रोत अभिलेख 3.15 · पुस्तक पृ. 639, 640
भावार्थ
मूल पाठ के बादइन्द्रियोंके विषयोंको और जहाँतक मन जाता है, हे भाई! उस सबको माया जानना। उसके भी—एक विद्या और दूसरी अविद्या, इन दोनों भेदोंको तुम सुनो—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 639 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 गो गोचर जहँ लगि मन जाई। सो सब माया जानेहु भाई।।
English explanation
The senses, their objects, and whatever the mind can reach—know all that to be maya, brother.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गो | इंद्रियाँ | the senses |
| गोचर | इंद्रियों के विषय | objects of the senses |
| जहँ | जहाँ | where |
| लगि | तक | as far as |
| मन | मन | the mind |
| जाई | पहुँचता है | reaches |
| सो | वह | that |
| सब | सब | all |
| माया | माया | maya |
| जानेहु | जानो | know to be |
| भाई | हे भाई लक्ष्मण | brother Lakshmana |
2 तेहि कर भेद सुनहु तुम्ह सोऊ। बिद्या अपर अबिद्या दोऊ।।
English explanation
Listen also to the distinctions within that maya: its two forms are vidya and the other, avidya.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उस माया | that maya |
| कर | के | of |
| भेद | भेद; प्रकार | distinctions; forms |
| सुनहु | सुनो | listen |
| तुम्ह | तुम | you |
| सोऊ | वह भी | that too |
| बिद्या | विद्या; ज्ञानमय रूप | vidya, the knowledge-bearing form |
| अपर | दूसरी | the other |
| अबिद्या | अविद्या; अज्ञानमय रूप | avidya, the ignorance-bearing form |
| दोऊ | दोनों | both |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 639
- सहायक विषय
- पञ्चवटी-निवास और श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 639, 640
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।