अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तीतिर लावक पदचर जूथा। बरनि न जाइ मनोज बरुथा।।
मूल पाठ
तीतिर लावक पदचर जूथा। बरनि न जाइ मनोज बरुथा।।
रथ गिरि सिला दुंदुभी झरना। चातक बंदी गुन गन बरना।।
स्रोत अभिलेख 3.38 · पुस्तक पृ. 670, 671
भावार्थ
मूल पाठ के बादतीतर और बटेर पैदल सिपाहियोंके झुंड हैं। कामदेवकी सेनाका वर्णन नहीं हो सकता। पर्वतोंकी शिलाएँ रथ और जलके झरने नगाड़े हैं। पपीहे भाट हैं, जो गुणसमूह (विरदावली) का वर्णन करते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 670 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तीतिर लावक पदचर जूथा। बरनि न जाइ मनोज बरुथा।।
English explanation
Partridges and quails resemble companies of infantry; this army of the god of desire defies description.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तीतिर | तीतर | partridges |
| लावक | बटेर | quails |
| पदचर | पैदल सैनिक | foot soldiers |
| जूथा | दल | companies |
| बरनि | वर्णन किया | be described |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | can |
| मनोज | कामदेव की | of the god of desire |
| बरुथा | सेना | army |
2 रथ गिरि सिला दुंदुभी झरना। चातक बंदी गुन गन बरना।।
English explanation
Mountain rocks serve as chariots and waterfalls as kettledrums; chatak birds act as bards proclaiming hosts of virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रथ | रथ | chariots |
| गिरि | पर्वत की | of the mountain |
| सिला | शिलाएँ | rocks |
| दुंदुभी | नगाड़े | kettledrums |
| झरना | झरने | waterfalls |
| चातक | चातक पक्षी | chatak birds |
| बंदी | यश गाने वाले भाट | praise-singing bards |
| गुन | गुणों के | of virtues |
| गन | समूह | hosts |
| बरना | वर्णन करते हैं | proclaim |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.38
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 670
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 670, 671
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।