अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब रघुबीर कहा मुनि पाहीं। तुम्ह सन प्रभु दुराव कछु नाही।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतब श्रीरामजीने मुनिसे कहा—हे प्रभो! आपसे तो कुछ छिपाव है नहीं। मैं जिस कारणसे आया हूँ वह आप जानते ही हैं। इसीसे हे तात! मैंने आपसे समझाकर कुछ नहीं कहा॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 637 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तब रघुबीर कहा मुनि पाहीं। तुम्ह सन प्रभु दुराव कछु नाही।।
तुम्ह जानहु जेहि कारन आयउँ। ताते तात न कहि समुझायउँ।।
स्रोत अभिलेख 3.13 · पुस्तक पृ. 637, 638
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तब रघुबीर कहा मुनि पाहीं। तुम्ह सन प्रभु दुराव कछु नाही।।
English explanation
Then Rama said to the sage, “Revered sir, nothing is concealed from you.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर श्रीराम | Rama, hero of Raghu’s lineage |
| कहा | कहा | said |
| मुनि | मुनि अगस्त्य | the sage Agastya |
| पाहीं | के पास; से | to; addressing |
| तुम्ह | आप | you |
| सन | से | from |
| प्रभु | हे आदरणीय प्रभु | O revered sir |
| दुराव | छिपाव | concealment |
| कछु | कुछ भी | anything |
| नाही | नहीं है | there is none |
2 तुम्ह जानहु जेहि कारन आयउँ। ताते तात न कहि समुझायउँ।।
English explanation
You know why I have come; therefore, dear father, I have not explained it in words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | आप | you |
| जानहु | जानते हैं | know |
| जेहि | जिस | which |
| कारन | कारण से | for the reason |
| आयउँ | मैं आया हूँ | I have come |
| ताते | इसलिए | therefore |
| तात | हे तात; आदरणीय पिता | dear father; revered elder |
| न | नहीं | not |
| कहि | कहकर | by stating |
| समुझायउँ | मैंने समझाया | I explained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 637
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 637, 638
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।