अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अब सो मंत्र देहु प्रभु मोही। जेहि प्रकार मारौं मुनिद्रोही।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे प्रभो! अब आप मुझे वही मन्त्र (सलाह) दीजिये, जिस प्रकार मैं मुनियोंके द्रोही राक्षसोंको मारूँ। प्रभुकी वाणी सुनकर मुनि मुस्कराये और बोले—हे नाथ! आपने क्या समझकर मुझसे यह प्रश्र किया है?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 637 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अब सो मंत्र देहु प्रभु मोही। जेहि प्रकार मारौं मुनिद्रोही।।
मुनि मुसकाने सुनि प्रभु बानी। पूछेहु नाथ मोहि का जानी।।
स्रोत अभिलेख 3.13 · पुस्तक पृ. 637, 638
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अब सो मंत्र देहु प्रभु मोही। जेहि प्रकार मारौं मुनिद्रोही।।
English explanation
Now, revered sir, give me the counsel by which I may slay the sages’ enemies.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| सो | वह | that |
| मंत्र | सलाह; उपाय | counsel; strategy |
| देहु | दीजिए | please give |
| प्रभु | हे प्रभु | O revered sir |
| मोही | मुझे | to me |
| जेहि | जिस | by which |
| प्रकार | रीति से | means |
| मारौं | मैं मार सकूँ | I may slay |
| मुनिद्रोही | मुनियों के शत्रुओं को | the enemies of sages |
2 मुनि मुसकाने सुनि प्रभु बानी। पूछेहु नाथ मोहि का जानी।।
English explanation
Hearing the Lord’s words, the sage smiled and said, “Lord, what do you take me to be, that you ask me?”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनि अगस्त्य | the sage Agastya |
| मुसकाने | मुस्कराए | smiled |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| प्रभु | प्रभु राम की | Lord Rama’s |
| बानी | वाणी | words |
| पूछेहु | आपने पूछा | you asked |
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| मोहि | मुझसे; मुझे | me |
| का | क्या | what |
| जानी | समझकर | taking to be |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 637
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 637, 638
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।