अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब कह गीध बचन धरि धीरा । सुनहु राम भंजन भव भीरा।।
मूल पाठ
तब कह गीध बचन धरि धीरा । सुनहु राम भंजन भव भीरा।।
नाथ दसानन यह गति कीन्ही। तेहि खल जनकसुता हरि लीन्ही।।
स्रोत अभिलेख 3.31 · पुस्तक पृ. 662, 663
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब धीरज धरकर गीधने यह वचन कहा—हे भव (जन्म-मृत्यु) के भयका नाश करनेवाले श्रीरामजी! सुनिये। हे नाथ! रावणने मेरी यह दशा की है। उसी दुष्टने जानकीजीको हर लिया है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 662 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तब कह गीध बचन धरि धीरा । सुनहु राम भंजन भव भीरा।।
English explanation
AI draft: Then the vulture Jatayu gathered his composure and said, “Listen, Rama, destroyer of the fear of worldly existence.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| कह | कहा | said |
| गीध | गीध जटायु ने | the vulture Jatayu |
| बचन | वचन | words |
| धरि | धारण करके | having gathered |
| धीरा | धीरज | composure |
| सुनहु | सुनिए | please listen |
| राम | हे राम | O Rama |
| भंजन | नाश करने वाले | destroyer of |
| भव | संसार का | of worldly existence |
| भीरा | भय | fear |
2 नाथ दसानन यह गति कीन्ही। तेहि खल जनकसुता हरि लीन्ही।।
English explanation
Lord, Ravana brought me to this condition. That villain abducted Janaka’s daughter Sita.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| दसानन | दस मुखों वाले रावण ने | the ten-headed Ravana |
| यह | यह | this |
| गति | दशा | condition |
| कीन्ही | कर दी | brought about |
| तेहि | उसने | that one |
| खल | दुष्ट ने | the villain |
| जनकसुता | जनक की पुत्री सीता को | Sita, daughter of Janaka |
| हरि | हरकर | having abducted |
| लीन्ही | ले लिया | took away |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.31
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 662
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका विलाप, जटायुका प्रसंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 662, 663
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