अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जन कहुँ कछु अदेय नहिं मोरें। अस बिस्वास तजहु जनि भोरें।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमुझे भक्तके लिये कुछ भी अदेय नहीं है। ऐसा विश्वास भूलकर भी मत छोड़ो। तब नारदजी हॢषत होकर बोले—मैं ऐसा वर माँगता हूँ, यह धृष्टता करता हूँ—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 674 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जन कहुँ कछु अदेय नहिं मोरें। अस बिस्वास तजहु जनि भोरें।।
तब नारद बोले हरषाई । अस बर मागउँ करउँ ढिठाई।।
स्रोत अभिलेख 3.42 · पुस्तक पृ. 674, 675
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जन कहुँ कछु अदेय नहिं मोरें। अस बिस्वास तजहु जनि भोरें।।
English explanation
There is nothing I would withhold from my devotee. Do not abandon this trust, even inadvertently.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जन | भक्त | devotee |
| कहुँ | को | to |
| कछु | कुछ भी | anything |
| अदेय | न देने योग्य | not to be given |
| नहिं | नहीं | not |
| मोरें | मेरे लिए | on my part |
| अस | ऐसा | such |
| बिस्वास | विश्वास | trust |
| तजहु | छोड़ो | abandon |
| जनि | मत | do not |
| भोरें | भूलकर भी | even inadvertently |
2 तब नारद बोले हरषाई । अस बर मागउँ करउँ ढिठाई।।
English explanation
Then Narada spoke joyfully: Taking this liberty, I ask for such a boon.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| नारद | देवर्षि नारद | Narada, the divine sage |
| बोले | बोले | spoke |
| हरषाई | प्रसन्न होकर | joyfully |
| अस | ऐसा | such |
| बर | वरदान | boon |
| मागउँ | मैं माँगता हूँ | I ask |
| करउँ | मैं करता हूँ | I take |
| ढिठाई | धृष्टता | a bold liberty |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.42
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 674
- सहायक विषय
- नारद-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 674, 675
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।