अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जद्यपि भगिनी कीन्ह कुरूपा। बध लायक नहिं पुरुष अनूपा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयद्यपि इन्होंने हमारी बहिनको कुरूप कर दिया तथापि ये अनुपम पुरुष वध करने योग्य नहीं हैं। 'छिपायी हुई अपनी स्त्री हमें तुरंत दे दो और दोनों भाई जीते-जी घर लौट जाओ॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 645 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जद्यपि भगिनी कीन्ह कुरूपा। बध लायक नहिं पुरुष अनूपा।।
देहु तुरत निज नारि दुराई। जीअत भवन जाहु द्वौ भाई।।
स्रोत अभिलेख 3.19 · पुस्तक पृ. 645, 646
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जद्यपि भगिनी कीन्ह कुरूपा। बध लायक नहिं पुरुष अनूपा।।
English explanation
Although he has disfigured our sister, this incomparable man does not deserve to be killed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जद्यपि | यद्यपि | although |
| भगिनी | बहन को | our sister |
| कीन्ह | कर दिया | made |
| कुरूपा | कुरूप | disfigured |
| बध | वध के | for killing |
| लायक | योग्य | fit |
| नहिं | नहीं | not |
| पुरुष | पुरुष | man |
| अनूपा | अनुपम | incomparable |
2 देहु तुरत निज नारि दुराई। जीअत भवन जाहु द्वौ भाई।।
English explanation
Hand over your concealed wife at once, and both of you brothers may go home alive.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देहु | दे दो | hand over |
| तुरत | तुरंत | immediately |
| निज | अपनी | your own |
| नारि | पत्नी | wife |
| दुराई | छिपाई हुई | hidden away |
| जीअत | जीवित | alive |
| भवन | घर | home |
| जाहु | जाओ | go |
| द्वौ | दोनों | both |
| भाई | भाई | brothers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.19
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 645
- सहायक विषय
- शूर्पणखाकी कथा, शूर्पणखाका खर-दूषणके पास जाना और खर-दूषणादिका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 645, 646
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।