अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चले राम त्यागा बन सोऊ। अतुलित बल नर केहरि दोऊ।।
मूल पाठ
चले राम त्यागा बन सोऊ। अतुलित बल नर केहरि दोऊ।।
बिरही इव प्रभु करत बिषादा। कहत कथा अनेक संबादा।।
स्रोत अभिलेख 3.37 · पुस्तक पृ. 669, 670
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामचन्द्रजीने उस वनको भी छोड़ दिया और वे आगे चले। दोनों भाई अतुलनीय बलवान् और मनुष्योंमें सिंहके समान हैं। प्रभु विरहीकी तरह विषाद करते हुए अनेकों कथाएँ और संवाद कहते हैं—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 669 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 चले राम त्यागा बन सोऊ। अतुलित बल नर केहरि दोऊ।।
English explanation
Rama left that forest too and went onward; both brothers are lions among men, of incomparable strength.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | आगे चले | went onward |
| राम | श्रीराम | Rama, the protagonist |
| त्यागा | छोड़ दिया | left behind |
| बन | वन | forest |
| सोऊ | वह भी | that too |
| अतुलित | जिसकी तुलना न हो | incomparable |
| बल | शक्ति | strength |
| नर | मनुष्यों में | among men |
| केहरि | सिंह | lions |
| दोऊ | दोनों भाई | both brothers |
2 बिरही इव प्रभु करत बिषादा। कहत कथा अनेक संबादा।।
English explanation
Like one suffering separation, the Lord grieves, recounting many stories and conversations.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिरही | प्रिय से बिछुड़ा व्यक्ति | one separated from a beloved |
| इव | के समान | like |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| करत | करते हुए | experiencing |
| बिषादा | दुःख | grief |
| कहत | कहते हुए | recounting |
| कथा | कथाएँ | stories |
| अनेक | बहुत-से | many |
| संबादा | संवाद | conversations |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.37
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 669
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 669, 670
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।