अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गीध देह तजि धरि हरि रुपा। भूषन बहु पट पीत अनूपा।।
मूल पाठ
गीध देह तजि धरि हरि रुपा। भूषन बहु पट पीत अनूपा।।
स्याम गात बिसाल भुज चारी। अस्तुति करत नयन भरि बारी।।
स्रोत अभिलेख 3.32 · पुस्तक पृ. 663, 663
भावार्थ
मूल पाठ के बादजटायुने गीधकी देह त्यागकर हरिका रूप धारण किया और बहुत-से अनुपम (दिव्य) आभूषण और [दिव्य] पीताम्बर पहन लिये। श्याम शरीर है, विशाल चार भुजाएँ हैं और नेत्रोंमें [प्रेम तथा आनन्दके आँसुओंका] जल भरकर वह स्तुति कर रहा है—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 663 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 गीध देह तजि धरि हरि रुपा। भूषन बहु पट पीत अनूपा।।
English explanation
Jatayu left his vulture body and assumed a form like Hari’s, adorned with many ornaments and exquisite yellow garments.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गीध | गिद्ध; यहाँ जटायु | vulture; here, Jatayu |
| देह | शरीर | body |
| तजि | त्यागकर | having left behind |
| धरि | धारण करके | having assumed |
| हरि | भगवान विष्णु | Lord Vishnu |
| रुपा | रूप | form |
| भूषन | आभूषण | ornaments |
| बहु | अनेक | many |
| पट | वस्त्र | garments |
| पीत | पीले | yellow |
| अनूपा | अनुपम; बेजोड़ सुंदर | exquisite; peerlessly beautiful |
2 स्याम गात बिसाल भुज चारी। अस्तुति करत नयन भरि बारी।।
English explanation
His body was dark-hued, with four mighty arms. With his eyes full of tears, he praised the Lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्याम | श्याम वर्ण का | dark-hued |
| गात | शरीर | body |
| बिसाल | विशाल | large and mighty |
| भुज | भुजाएँ | arms |
| चारी | चार | four |
| अस्तुति | स्तुति; गुणों का गान | praise; extolling the Lord |
| करत | कर रहे थे | was offering |
| नयन | आँखें; यहाँ आँखों में | eyes; here, in his eyes |
| भरि | भरकर | filled with |
| बारी | जल; यहाँ आँसू | water; here, tears |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.32
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 663
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका विलाप, जटायुका प्रसंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 663, 663
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