अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
क्रोध मनोज लोभ मद माया। छूटहिं सकल राम कीं दाया।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दक्रोध, काम, लोभ, मद और माया—ये सभी श्रीरामजीकी दयासे छूट जाते हैं। वह नट (नटराजभगवान्) जिसपर प्रसन्न होता है, वह मनुष्य इन्द्रजाल (माया) में नहंीं भूलता॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 671 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
क्रोध मनोज लोभ मद माया। छूटहिं सकल राम कीं दाया।।
सो नर इंद्रजाल नहिं भूला। जा पर होइ सो नट अनुकूला।।
स्रोत अभिलेख 3.39 · पुस्तक पृ. 671, 672
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 क्रोध मनोज लोभ मद माया। छूटहिं सकल राम कीं दाया।।
English explanation
Through Rama's mercy, anger, lust, greed, pride, and illusion all fall away.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| क्रोध | क्रोध | anger |
| मनोज | कामदेव; कामवासना | the god of desire; lust |
| लोभ | लोभ | greed |
| मद | अहंकार या घमंड | pride or arrogance |
| माया | माया का मोह | the delusion of maya |
| छूटहिं | छूट जाते हैं | fall away |
| सकल | सब | all |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| कीं | की | of |
| दाया | दया से | through mercy |
2 सो नर इंद्रजाल नहिं भूला। जा पर होइ सो नट अनुकूला।।
English explanation
The person whom that performer favors is not deluded by his magic show.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह | that |
| नर | मनुष्य | person |
| इंद्रजाल | मायाजाल में | by the magic show |
| नहिं | नहीं | not |
| भूला | भ्रमित होता | is deluded |
| जा | जिसके | whom |
| पर | प्रति | toward |
| होइ | होता है | is |
| सो | वह | that |
| नट | नट, यहाँ राम का रूपक | performer, here a metaphor for Rama |
| अनुकूला | कृपालु या अनुकूल | gracious or favorable |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.39
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 671
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 671, 672
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।