अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गुनातीत सचराचर स्वामी। राम उमा सब अंतरजामी।।
मूल पाठ
गुनातीत सचराचर स्वामी। राम उमा सब अंतरजामी।।
कामिन्ह कै दीनता देखाई। धीरन्ह कें मन बिरति दृढ़ाई।।
स्रोत अभिलेख 3.39 · पुस्तक पृ. 671, 672
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[शिवजी कहते हैं—] हे पार्वती! श्रीरामचन्द्रजी गुणातीत (तीनों गुणोंसे परे), चराचर जगत्के स्वामी और सबके अन्तरकी जाननेवाले हैं। [उपर्युक्त बातें कहकर] उन्होंने कामी लोगोंकी दीनता (बेबसी) दिखलायी है और धीर (विवेकी) पुरुषोंके मनमें वैराग्यको दृढ़ किया है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 671 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 गुनातीत सचराचर स्वामी। राम उमा सब अंतरजामी।।
English explanation
AI-draft meaning: O Uma, Rama is beyond the qualities of nature, lord of all moving and unmoving beings, and knower of everyone's inner heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुनातीत | प्रकृति के गुणों से परे | beyond the qualities of nature |
| सचराचर | समस्त चर और अचर जगत के | of all moving and unmoving existence |
| स्वामी | स्वामी | lord |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| उमा | हे उमा, पार्वती | O Uma, Parvati |
| सब | सबके | of everyone |
| अंतरजामी | अंतर की बात जानने वाले | knower of the inner heart |
2 कामिन्ह कै दीनता देखाई। धीरन्ह कें मन बिरति दृढ़ाई।।
English explanation
He showed the pitiable condition of those ruled by desire and strengthened detachment in the minds of the steadfast.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कामिन्ह | कामासक्त लोगों | people ruled by desire |
| कै | की | of |
| दीनता | दीन दशा | pitiable condition |
| देखाई | दिखाई | showed |
| धीरन्ह | धीर लोगों | steadfast people |
| कें | के | of |
| मन | मन में | in the minds |
| बिरति | वैराग्य | detachment |
| दृढ़ाई | दृढ़ किया | strengthened |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.39
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 671
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 671, 672
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।