अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कुहू कुहू कोकिल धुनि करहीं। सुनि रव सरस ध्यान मुनि टरहीं।।
मूल पाठ
कुहू कुहू कोकिल धुनि करहीं। सुनि रव सरस ध्यान मुनि टरहीं।।
स्रोत अभिलेख 3.4 · पुस्तक पृ. 672, 673
भावार्थ
मूल पाठ के बादकोयलें 'कुहू 'कुहू का शब्द कर रही हैं। उनकी रसीली बोली सुनकर मुनियोंका भी ध्यान टूट जाता है॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 673 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कुहू कुहू कोकिल धुनि करहीं। सुनि रव सरस ध्यान मुनि टरहीं।।
English explanation
The cuckoos call ‘coo, coo’; hearing their melodious voices, the sages are drawn out of meditation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुहू | कोयल की ‘कुहू’ पुकार | a cuckoo’s coo |
| कुहू | फिर ‘कुहू’ पुकार | a repeated coo |
| कोकिल | कोयलें | cuckoos |
| धुनि | ध्वनि | sound |
| करहीं | करती हैं | make |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| रव | स्वर | voices |
| सरस | मधुर | melodious |
| ध्यान | ध्यान से | from meditation |
| मुनि | मुनि | the sages |
| टरहीं | विचलित हो जाते हैं | are drawn away |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 673
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 672, 673
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।