अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कह मुनि सुनु रघुबीर कृपाला। संकर मानस राजमराला।।
मूल पाठ
कह मुनि सुनु रघुबीर कृपाला। संकर मानस राजमराला।।
जात रहेउँ बिरंचि के धामा। सुनेउँ श्रवन बन ऐहहिं रामा।।
स्रोत अभिलेख 3.8 · पुस्तक पृ. 629, 630
भावार्थ
मूल पाठ के बादमुनिने कहा—हे कृपालु रघुवीर! हे शंकरजीके मनरूपी मानसरोवरके राजहंस! सुनिये, मैं ब्रह्मलोकको जा रहा था। [इतनेमें] कानोंसे सुना कि श्रीरामजी वनमें आवेंगे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 629 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कह मुनि सुनु रघुबीर कृपाला। संकर मानस राजमराला।।
English explanation
The sage said: Listen, compassionate hero of Raghu’s line, royal swan of the lake of Shiva’s mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहा | said |
| मुनि | मुनि शरभंग ने | the sage Sharabhanga |
| सुनु | सुनिए | listen |
| रघुबीर | हे रघुकुल के वीर राम | O Rama, hero of Raghu’s line |
| कृपाला | हे कृपालु | O compassionate one |
| संकर | शंकर के | of Shiva |
| मानस | मनरूपी मानस-सरोवर | the lake of the mind |
| राजमराला | हे राजहंस | O royal swan |
2 जात रहेउँ बिरंचि के धामा। सुनेउँ श्रवन बन ऐहहिं रामा।।
English explanation
I was going to Brahma’s abode when I heard that Rama would come to the forest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जात | जा | going |
| रहेउँ | रहा था मैं | I was |
| बिरंचि | ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| के | के | of |
| धामा | धाम को | to the abode |
| सुनेउँ | मैंने सुना | I heard |
| श्रवन | कानों से | with my ears |
| बन | वन में | to the forest |
| ऐहहिं | आएँगे | would come |
| रामा | राम | Rama |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 629
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका आगे प्रस्थान, विराध-वध और शरभङ्ग-प्रसङ्ग
- मुद्रित पृष्ठ
- 629, 630
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।