अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एवमस्तु करि रमानिवासा। हरषि चले कुभंज रिषि पासा।।
मूल पाठ
एवमस्तु करि रमानिवासा। हरषि चले कुभंज रिषि पासा।।
बहुत दिवस गुर दरसन पाएँ। भए मोहि एहिं आश्रम आएँ।।
स्रोत अभिलेख 3.12 · पुस्तक पृ. 635, 636
भावार्थ
मूल पाठ के बाद'एवमस्तु (ऐसा ही हो) ऐसा उच्चारण कर लक्ष्मीनिवास श्रीरामचन्द्रजी हॢषत होकर अगस्त्य ऋषिके पास चले। [तब सुतीक्ष्णजी बोले—] गुरु अगस्त्यजीका दर्शन पाये और इस आश्रममें आये मुझे बहुत दिन हो गये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 635 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 एवमस्तु करि रमानिवासा। हरषि चले कुभंज रिषि पासा।।
English explanation
Saying “So be it,” Rama, the abode of Lakshmi, joyfully set out toward sage Agastya.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एवमस्तु | ऐसा ही हो | so be it |
| करि | कहकर स्वीकार करके | having assented |
| रमानिवासा | लक्ष्मी के निवास, राम | Rama, the abode of Lakshmi |
| हरषि | हर्षित होकर | joyfully |
| चले | चल पड़े | set out |
| कुभंज | कुंभ को भंग करने वाले अगस्त्य | Agastya, the pot-shattering sage |
| रिषि | ऋषि | sage |
| पासा | के पास | toward |
2 बहुत दिवस गुर दरसन पाएँ। भए मोहि एहिं आश्रम आएँ।।
English explanation
Sutikshna said: It has been many days since I came to this hermitage and had sight of my teacher.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुत | बहुत | many |
| दिवस | दिन | days |
| गुर | गुरु के | of my teacher |
| दरसन | दर्शन | a reverent sight |
| पाएँ | प्राप्त किए हुए | since having obtained |
| भए | हो गए हैं | have elapsed |
| मोहि | मुझे | for me |
| एहिं | इस | this |
| आश्रम | आश्रम में | to the hermitage |
| आएँ | आए हुए | since having come |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 635
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 635, 636
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।