अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अब प्रभु संग जाउँ गुर पाहीं। तुम्ह कहँ नाथ निहोरा नाहीं।।
मूल पाठ
अब प्रभु संग जाउँ गुर पाहीं। तुम्ह कहँ नाथ निहोरा नाहीं।।
देखि कृपानिधि मुनि चतुराई। लिए संग बिहसै द्वौ भाई।।
स्रोत अभिलेख 3.12 · पुस्तक पृ. 635, 636
भावार्थ
मूल पाठ के बादअब मैं भी प्रभु (आप) के साथ गुरुजीके पास चलता हूँ। इसमें हे नाथ! आपपर मेरा कोई एहसान नहीं है। मुनिकी चतुरता देखकर कृपाके भण्डार श्रीरामजीने उनको साथ ले लिया और दोनों भाई हँसने लगे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 636 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अब प्रभु संग जाउँ गुर पाहीं। तुम्ह कहँ नाथ निहोरा नाहीं।।
English explanation
Now let me go with you, Lord, to my teacher; this asks no additional favor of you, my master.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| प्रभु | प्रभु राम के | with Lord Rama |
| संग | साथ | together |
| जाउँ | मैं जाऊँ | let me go |
| गुर | गुरु के | my teacher's |
| पाहीं | पास | presence |
| तुम्ह | आप | you |
| कहँ | से / के लिए | of / for |
| नाथ | हे स्वामी | O master |
| निहोरा | उपकार की याचना | request for a favor |
| नाहीं | नहीं है | there is none |
2 देखि कृपानिधि मुनि चतुराई। लिए संग बिहसै द्वौ भाई।।
English explanation
Seeing the sage's cleverness, compassionate Rama took him along, and both brothers smiled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | seeing |
| कृपानिधि | कृपा के भंडार राम | Rama, the treasury of compassion |
| मुनि | सुतीक्ष्ण मुनि की | of sage Sutikshna |
| चतुराई | चतुराई | cleverness |
| लिए | ले लिया | took him |
| संग | साथ | along |
| बिहसै | मुस्कराए | smiled |
| द्वौ | दोनों | both |
| भाई | भाई, राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 636
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 635, 636
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।