अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उभय भाँति देखा निज मरना। तब ताकिसि रघुनायक सरना।।
मूल पाठ
उभय भाँति देखा निज मरना। तब ताकिसि रघुनायक सरना।।
उतरु देत मोहि बधब अभागें। कस न मरौं रघुपति सर लागें।।
स्रोत अभिलेख 3.26 · पुस्तक पृ. 654, 654
भावार्थ
मूल पाठ के बादजब मारीचने दोनों प्रकारसे अपना मरण देखा, तब उसने श्रीरघुनाथजीकी शरण तकी (अर्थात् उनकी शरण जानेमें ही कल्याण समझा)। [सोचा कि] उत्तर देते ही (नाहीं करते ही) यह अभागा मुझे मार डालेगा। फिर श्रीरघुनाथजीके बाण लगनेसे ही क्यों न मरूँ?॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 654 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 उभय भाँति देखा निज मरना। तब ताकिसि रघुनायक सरना।।
English explanation
Maricha saw his own death in either course; he then resolved to seek refuge in Rama, leader of Raghu's line.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उभय | दोनों | both |
| भाँति | प्रकारों में; स्थितियों में | in ways; in courses |
| देखा | देखा; समझा | saw; recognized |
| निज | अपना | his own |
| मरना | मृत्यु होना | death; dying |
| तब | तब | then |
| ताकिसि | उसने लक्ष्य किया; निश्चय किया | he set his sights on; resolved upon |
| रघुनायक | रघुवंश के नायक राम की | of Rama, leader of Raghu's line |
| सरना | शरण | refuge |
2 उतरु देत मोहि बधब अभागें। कस न मरौं रघुपति सर लागें।।
English explanation
That wretched Ravana will kill me if I answer back; why should I not instead die struck by Rama's arrow?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उतरु | जवाब; प्रतिवाद | reply; retort |
| देत | देने पर | upon giving |
| मोहि | मुझे | me |
| बधब | मार डालेगा | will kill |
| अभागें | उस अभागे रावण द्वारा | by that wretched Ravana |
| कस | क्यों | why |
| न | न | not |
| मरौं | मैं मरूँ | should I die |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम का | of Rama, lord of Raghu's line |
| सर | बाण | arrow |
| लागें | लगने से | by being struck |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.26
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 654
- सहायक विषय
- मारीचप्रसंग और स्वर्ण-मृगरूपमें मारीचका मारा जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 654, 654
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।