अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस जियँ जानि दसानन संगा। चला राम पद प्रेम अभंगा।।
मूल पाठ
अस जियँ जानि दसानन संगा। चला राम पद प्रेम अभंगा।।
मन अति हरष जनाव न तेही। आजु देखिहउँ परम सनेही।।
स्रोत अभिलेख 3.26 · पुस्तक पृ. 654, 654
भावार्थ
मूल पाठ के बादहृदयमें ऐसा समझकर वह रावणके साथ चला। श्रीरामजीके चरणोंमें उसका अखण्ड प्रेम है। उसके मनमें इस बातका अत्यन्त हर्ष है कि आज मैं अपने परम स्नेही श्रीरामजीको देखूँगा; किन्तु उसने यह हर्ष रावणको नहीं जनाया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 654 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अस जियँ जानि दसानन संगा। चला राम पद प्रेम अभंगा।।
English explanation
With this understanding in his heart, Maricha went with Ravana, his love for Rama's feet unbroken.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus; this |
| जियँ | मन में | in his heart |
| जानि | समझकर | having understood |
| दसानन | दस मुख वाले रावण के | of ten-headed Ravana |
| संगा | साथ | with |
| चला | चला; रवाना हुआ | went; set out |
| राम | राम के | of Rama |
| पद | चरणों के प्रति | toward the feet |
| प्रेम | प्रेम | love |
| अभंगा | अटूट | unbroken; unwavering |
2 मन अति हरष जनाव न तेही। आजु देखिहउँ परम सनेही।।
English explanation
Maricha felt great joy within but did not reveal it to Ravana. He thought: Today I shall see Rama, my most beloved.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन में | in his heart |
| अति | बहुत | great; very |
| हरष | आनंद | joy |
| जनाव | प्रकट करता है; बताता है | reveals; makes known |
| न | नहीं | not |
| तेही | उसे, अर्थात रावण को | to him, Ravana |
| आजु | आज | today |
| देखिहउँ | मैं देखूँगा | I shall see |
| परम | अत्यंत; सबसे बढ़कर | most; supremely |
| सनेही | प्रिय; प्रेम करने वाले राम | beloved, loving Rama |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.26
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 654
- सहायक विषय
- मारीचप्रसंग और स्वर्ण-मृगरूपमें मारीचका मारा जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 654, 654
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।