अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अति प्रसन्न रघुनाथहि जानी। पुनि नारद बोले मृदु बानी।।
मूल पाठ
अति प्रसन्न रघुनाथहि जानी। पुनि नारद बोले मृदु बानी।।
राम जबहिं प्रेरेउ निज माया। मोहेहु मोहि सुनहु रघुराया।।
स्रोत अभिलेख 3.43 · पुस्तक पृ. 675, 676
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरघुनाथजीको अत्यन्त प्रसन्न जानकर नारदजी फिर कोमल वाणी बोले—हे रामजी! हे रघुनाथजी! सुनिये, जब आपने अपनी मायाको प्रेरित करके मुझे मोहित किया था,॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 675 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अति प्रसन्न रघुनाथहि जानी। पुनि नारद बोले मृदु बानी।।
English explanation
AI draft interpretation: Knowing Rama to be very pleased, Narada spoke again in gentle words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | very |
| प्रसन्न | प्रसन्न | pleased |
| रघुनाथहि | रघुनाथ राम को | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| जानी | जानकर | recognizing |
| पुनि | फिर | again |
| नारद | देवर्षि नारद | Narada, the divine sage |
| बोले | बोले | spoke |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी | words |
2 राम जबहिं प्रेरेउ निज माया। मोहेहु मोहि सुनहु रघुराया।।
English explanation
O Rama, lord of Raghu’s lineage, listen! When you set your own maya in motion and deluded me—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | हे राम | O Rama |
| जबहिं | जब ही | when |
| प्रेरेउ | आपने प्रेरित किया | you set in motion |
| निज | अपनी | your own |
| माया | मोह उत्पन्न करने वाली शक्ति | power of illusion |
| मोहेहु | आपने मोहित किया | you deluded |
| मोहि | मुझे | me |
| सुनहु | सुनिए | listen |
| रघुराया | हे रघुवंश के राजा | O king of Raghu’s lineage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.43
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 675
- सहायक विषय
- नारद-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 675, 676
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।