मूल पाठ · शब्दार्थ · भावार्थ
उत्तरकाण्ड दोहा · पृ. 951
AI प्रारूपये संदर्भानुसार AI द्वारा बनाए गए शब्दार्थ और भावार्थ हैं। विद्वान की समीक्षा बाकी है; त्रुटियाँ संभव हैं।14 / 14 शब्दों के अर्थ उपलब्ध
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दोहा
।
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| वह व्यक्ति | that person | |
| परलोक में | in the world beyond | |
| दुःख | suffering | |
| पाता है | experiences | |
| सिर | his head | |
| पीटकर | beating | |
| बार-बार पीटकर | beating repeatedly | |
| पछताता है | repents |
भावार्थ
वह परलोक में दुःख पाता है और बार-बार सिर पीटकर पछताता है। (यह एआई-निर्मित अर्थ-प्रारूप है।)
That person suffers in the world beyond and repents, beating his head again and again. (This is an AI-generated draft interpretation.)
॥ ४३॥
| अवधी / मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काल पर | on time | |
| कर्म पर | on karma | |
| ईश्वर पर | on God | |
| झूठा; निराधार | falsely; without grounds | |
| दोष | blame | |
| लगाता है | lays |
भावार्थ
वह काल, कर्म और ईश्वर पर व्यर्थ ही दोष लगाता है।
He falsely lays the blame on time, karma, and God.