लङ्काकाण्ड · दोहा 116 (ग) · दोहा
बीतें अवधि जाउँ जौं जिअत न पावउँ बीर।
बीतें अवधि जाउँ जौं जिअत न पावउँ बीर।
सुमिरत अनुज प्रीति प्रभु पुनि पुनि पुलक सरीर॥ ११६ (ग)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.116 · पुस्तक पृ. 896, 896
भावार्थ और शब्दार्थ
1बीतें अवधि जाउँ जौं जिअत न पावउँ बीर।
यदि मैं निर्धारित अवधि बीत जाने पर जाऊँ और अपने वीर भाई को जीवित न पाऊँ—
English explanation
If I go after the appointed period has elapsed and do not find my brave brother alive—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बीतें | बीत जाने पर | after the passing of |
| अवधि | निर्धारित समय-सीमा | the appointed period |
| जाउँ | मैं जाऊँ | I go |
| जौं | यदि | if |
| जिअत | जीवित | alive |
| न | नहीं | not |
| पावउँ | मैं पाऊँ | I find |
| बीर | वीर भाई भरत को | my brave brother Bharata |
2सुमिरत अनुज प्रीति प्रभु पुनि पुनि पुलक सरीर॥ ११६ (ग)॥
छोटे भाई भरत का प्रेम स्मरण करते हुए प्रभु राम का शरीर बार-बार रोमांचित हो उठता है।
English explanation
Remembering his younger brother Bharata’s love, Lord Rama’s body repeatedly thrills with goosebumps.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुमिरत | स्मरण करते हुए | while remembering |
| अनुज | छोटे भाई भरत का | of his younger brother Bharata |
| प्रीति | प्रेम | love |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| पुलक | रोमांचित | thrilled with goosebumps |
| सरीर | शरीर | body |
| ग | पद्य-संदर्भ चिह्न (ग) | verse reference marker (c) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 116 (ग)
- स्रोत अभिलेख
- 6.116
- सहायक विषय
- विभीषणकी प्रार्थना, श्रीरामजीके द्वारा भरतजीके प्रेमदशाका वर्णन, शीघ्र अयोध्या पहुँचनेका अनुरोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 896, 896
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।