लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
जनु राहु केतु अनेक नभ पथ स्रवत सोनित धावहीं।
मूल पाठ
जनु राहु केतु अनेक नभ पथ स्रवत सोनित धावहीं।
रघुबीर तीर प्रचंड लागहिं भूमि गिरन न पावहीं॥
एक एक सर सिर निकर छेदे नभ उड़त इमि सोहहीं।
जनु कोपि दिनकर कर निकर जहँ तहँ बिधुंतुद पोहहीं॥
स्रोत अभिलेख 6.92 · पुस्तक पृ. 865, 866
भावार्थ
मूल पाठ के बादमानो अनेकों राहु और केतु रुधिर बहाते हुए आकाशमार्गसे दौड़ रहे हों। श्रीरघुवीरके प्रचण्ड बाणोंके [बार-बार] लगनेसे वे पृथ्वीपर गिरने नहीं पाते। एक-एक बाणसे समूह-के-समूह सिर छिदे हुए आकाशमें उड़ते ऐसे शोभा दे रहे हैं मानो सूर्यकी किरणें क्रोध करके जहाँ-तहाँ राहुओंको पिरो रही हों।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 866 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1जनु राहु केतु अनेक नभ पथ स्रवत सोनित धावहीं।
English explanation
As though numerous Rahus and Ketus were racing through the sky, streaming blood.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनु | मानो | as though |
| राहु | राहु—ग्रहण से संबद्ध पौराणिक ग्रह | Rahu, the mythical eclipse-causing celestial being |
| केतु | केतु—पौराणिक छाया-ग्रह | Ketu, the mythical shadow planet |
| अनेक | बहुत-से | numerous |
| नभ | आकाश | sky |
| पथ | मार्ग में | along the path |
| स्रवत | बहाते हुए | streaming |
| सोनित | रक्त | blood |
| धावहीं | दौड़ते हैं | race |
2रघुबीर तीर प्रचंड लागहिं भूमि गिरन न पावहीं॥
English explanation
Rama’s fierce arrows strike those heads, preventing them from falling to the ground.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुबीर | रघुकुल के वीर राम के | of Rama, the hero of Raghu’s lineage |
| तीर | बाण | arrows |
| प्रचंड | अत्यंत शक्तिशाली | fierce and powerful |
| लागहिं | लगते हैं | strike |
| भूमि | धरती पर | to the ground |
| गिरन | गिरने | to fall |
| न | नहीं | not |
| पावहीं | पाते हैं | are able |
3एक एक सर सिर निकर छेदे नभ उड़त इमि सोहहीं।
English explanation
The clusters of heads pierced by individual arrows appear thus as they fly through the sky.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | एक | one |
| एक | एक | by one |
| सर | बाण से | by an arrow |
| सिर | सिरों के | of heads |
| निकर | समूह | clusters |
| छेदे | बेधे गए | pierced |
| नभ | आकाश में | in the sky |
| उड़त | उड़ते हुए | flying |
| इमि | इस प्रकार | in this manner |
| सोहहीं | दिखाई देते हैं | appear |
4जनु कोपि दिनकर कर निकर जहँ तहँ बिधुंतुद पोहहीं॥
English explanation
As though the enraged sun’s hosts of rays were piercing Rahus here and there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनु | मानो | as though |
| कोपि | क्रोधित होकर | in anger |
| दिनकर | सूर्य के | of the sun |
| कर | किरणों के | of rays |
| निकर | समूह | hosts |
| जहँ | जहाँ | here |
| तहँ | तहाँ | and there |
| बिधुंतुद | राहुओं को | Rahus |
| पोहहीं | बेधते हैं | pierce |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.92
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 866
- सहायक विषय
- इन्द्रका श्रीरामजीके लिये रथ भेजना, राम-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 865, 866
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।