लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनत बिभीषन बचन राम के। हरषि गहे पद कृपाधाम के।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामचन्द्रजीके वचन सुनते ही विभीषणजीने हर्षित होकर कृपाके धाम श्रीरामजीके चरण पकड़ लिये। सभी वानर-भालू हर्षित हो गये और प्रभुके चरण पकड़कर उनके निर्मल गुणोंका बखान करने लगे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 897 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनत बिभीषन बचन राम के। हरषि गहे पद कृपाधाम के।।
बानर भालु सकल हरषाने। गहि प्रभु पद गुन बिमल बखाने।।
स्रोत अभिलेख 6.117 · पुस्तक पृ. 897, 898
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनत बिभीषन बचन राम के। हरषि गहे पद कृपाधाम के।।
English explanation
On hearing Rama’s words, Vibhishana joyfully clasped the feet of Rama, the abode of compassion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| बिभीषन | विभीषण ने | Vibhishana, Ravana’s brother |
| बचन | वचन | words |
| राम | राम | Rama |
| के | के | of |
| हरषि | हर्षित होकर | rejoicing |
| गहे | पकड़ लिए | clasped |
| पद | चरण | feet |
| कृपाधाम | कृपा के धाम राम | Rama, the abode of compassion |
| के | के | of |
2 बानर भालु सकल हरषाने। गहि प्रभु पद गुन बिमल बखाने।।
English explanation
All the monkeys and bears rejoiced. Clasping the Lord’s feet, they praised his pure virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बानर | वानर | monkeys |
| भालु | भालू | bears |
| सकल | सभी | all |
| हरषाने | हर्षित हुए | rejoiced |
| गहि | पकड़कर | clasping |
| प्रभु | प्रभु राम के | of Lord Rama |
| पद | चरण | feet |
| गुन | गुण | virtues |
| बिमल | निर्मल | pure |
| बखाने | वर्णन किया | praised |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.117
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 897
- सहायक विषय
- विभीषणका वस्त्राभूषण बरसाना और वानर-भालुओंका उन्हें पहनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 897, 898
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