लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मेघनाद के मुरछा जागी। पितहि बिलोकि लाज अति लागी।।
मूल पाठ
मेघनाद के मुरछा जागी। पितहि बिलोकि लाज अति लागी।।
तुरत गयउ गिरिबर कंदरा। करौं अजय मख अस मन धरा।।
स्रोत अभिलेख 6.75 · पुस्तक पृ. 844, 845
भावार्थ
मूल पाठ के बादमेघनादकी मूच्र्छा छूटी, [तब] पिताको देखकर उसे बड़ी शर्म लगी। मैं अजय (अजेय होनेको) यज्ञ करूँ, ऐसा मनमें निश्चय करके वह तुरंत श्रेष्ठ पर्वतकी गुफामें चला गया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 844 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मेघनाद के मुरछा जागी। पितहि बिलोकि लाज अति लागी।।
English explanation
Meghnad regained consciousness. Seeing his father, he felt deeply ashamed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मेघनाद | रावण का पुत्र मेघनाद | Meghnad, Ravana’s son |
| के | की | of |
| मुरछा | मूर्छा; बेहोशी | unconsciousness |
| जागी | खुली; चेतना लौटी | ended; consciousness returned |
| पितहि | पिता को | his father |
| बिलोकि | देखकर | upon seeing |
| लाज | लज्जा | shame |
| अति | बहुत | greatly |
| लागी | अनुभव हुई | was felt |
2 तुरत गयउ गिरिबर कंदरा। करौं अजय मख अस मन धरा।।
English explanation
He immediately went to a cave in a great mountain, resolving to perform a sacrifice that would make him invincible.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुरत | तुरंत | immediately |
| गयउ | गया | went |
| गिरिबर | बड़े पर्वत की | of a great mountain |
| कंदरा | गुफा में | into a cave |
| करौं | मैं करूँ | I shall perform |
| अजय | अजेय बनाने वाला | conferring invincibility |
| मख | यज्ञ | sacrifice |
| अस | ऐसा | thus |
| मन | मन में | in his mind |
| धरा | निश्चय किया | resolved |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.75
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 844
- सहायक विषय
- मेघनादका युद्ध, रामजीका लीलासे नागपाशमें बँधना
- मुद्रित पृष्ठ
- 844, 845
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।