लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भालु कपिन्ह पट भूषन पाए। पहिरि पहिरि रघुपति पहिं आए।।
मूल पाठ
भालु कपिन्ह पट भूषन पाए। पहिरि पहिरि रघुपति पहिं आए।।
नाना जिनस देखि सब कीसा। पुनि पुनि हँसत कोसलाधीसा।।
स्रोत अभिलेख 6.118 · पुस्तक पृ. 898, 899
भावार्थ
मूल पाठ के बादभालुओं और वानरोंने कपड़े-गहने पाये और उन्हें पहन-पहनकर वे श्रीरघुनाथजीके पास आये। अनेकों जातियोंके वानरोंको देखकर कोसलपति श्रीरामजी बार-बार हँस रहे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 898 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भालु कपिन्ह पट भूषन पाए। पहिरि पहिरि रघुपति पहिं आए।।
English explanation
The bears and monkeys received garments and ornaments, put them on, and came to Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भालु | भालुओं ने | the bears |
| कपिन्ह | वानरों ने | the monkeys |
| पट | वस्त्र | garments |
| भूषन | आभूषण | ornaments |
| पाए | प्राप्त किए | received |
| पहिरि | पहनकर | putting on |
| पहिरि | पहनकर | putting on |
| रघुपति | श्रीराम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| पहिं | के पास | to |
| आए | आए | came |
2 नाना जिनस देखि सब कीसा। पुनि पुनि हँसत कोसलाधीसा।।
English explanation
Seeing all the monkeys in their varied attire, Rama, lord of Kosala, laughed again and again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाना | तरह-तरह के | various |
| जिनस | प्रकार या वेश | kinds of attire |
| देखि | देखकर | seeing |
| सब | सभी | all |
| कीसा | वानरों को | the monkeys |
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| हँसत | हँस रहे थे | were laughing |
| कोसलाधीसा | कोसल के स्वामी श्रीराम | Rama, lord of Kosala |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.118
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 898
- सहायक विषय
- विभीषणका वस्त्राभूषण बरसाना और वानर-भालुओंका उन्हें पहनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 898, 899
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