लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि उठि झपटहीं सुर आराती। टरइ न कीस चरन एहि भाँती।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[काकभुशुण्डिजी कहते हैं—] वे देवताओंके शत्रु (राक्षस) फिर उठकर झपटते हैं। परन्तु हे सर्पोंके शत्रु गरुडज़ी! अङ्गदका चरण उनसे वैसे ही नहीं टलता जैसे कुयोगी (विषयी) पुरुष मोहरूपी वृक्षको नहीं उखाड़ सकते॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 805 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पुनि उठि झपटहीं सुर आराती। टरइ न कीस चरन एहि भाँती।।
पुरुष कुजोगी जिमि उरगारी। मोह बिटप नहिं सकहिं उपारी।।
स्रोत अभिलेख 6.34 · पुस्तक पृ. 804, 805
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पुनि उठि झपटहीं सुर आराती। टरइ न कीस चरन एहि भाँती।।
English explanation
The enemies of the gods rise and rush at him again, but the monkey's foot does not move this way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | again |
| उठि | उठकर | rising |
| झपटहीं | झपटते हैं | rush at him |
| सुर | देवताओं के | of the gods |
| आराती | शत्रु | enemies |
| टरइ | हिलता | moves |
| न | नहीं | not |
| कीस | वानर का | the monkey's |
| चरन | पैर | foot |
| एहि | इस | this |
| भाँती | तरह | way |
2 पुरुष कुजोगी जिमि उरगारी। मोह बिटप नहिं सकहिं उपारी।।
English explanation
O Garuda, just as men inept in yogic practice cannot uproot the tree of delusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुरुष | मनुष्य | men |
| कुजोगी | साधना में अयोग्य | inept in yogic practice |
| जिमि | जैसे | just as |
| उरगारी | हे सर्पों के शत्रु गरुड़ | O Garuda, enemy of serpents |
| मोह | मोह का | of delusion |
| बिटप | वृक्ष | tree |
| नहिं | नहीं | not |
| सकहिं | कर सकते | can |
| उपारी | उखाड़ना | uproot |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.34
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 805
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 804, 805
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।