लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखेसि आवत पबि सम बाना। तुरत भयउ खल अंतरधाना।।
मूल पाठ
देखेसि आवत पबि सम बाना। तुरत भयउ खल अंतरधाना।।
बिबिध बेष धरि करइ लराई। कबहुँक प्रगट कबहुँ दुरि जाई।।
स्रोत अभिलेख 6.76 · पुस्तक पृ. 845, 847
भावार्थ
मूल पाठ के बादवज्रके समान बाणोंको आते देखकर वह दुष्ट तुरंत अन्तर्धान हो गया और फिर भाँति- भाँतिके रूप धारण करके युद्ध करने लगा। वह कभी प्रकट होता था और कभी छिप जाता था॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 846 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 देखेसि आवत पबि सम बाना। तुरत भयउ खल अंतरधाना।।
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2 बिबिध बेष धरि करइ लराई। कबहुँक प्रगट कबहुँ दुरि जाई।।
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स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.76
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 846
- सहायक विषय
- मेघनाद-यज्ञ-विध्वंस, युद्ध और मेघनाद-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 845, 847
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