लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तदपि न उठइ धरेन्हि कच जाई। लातन्हि हति हति चले पराई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दइतनेपर भी वह न उठा, [तब] उन्होंने जाकर उसके बाल पकड़े और लातोंसे मार-मारकर वे भाग चले। वह त्रिशूल लेकर दौड़ा, तब वानर भागे और वहाँ आ गये जहाँ आगे लक्ष्मणजी खड़े थे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 846 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तदपि न उठइ धरेन्हि कच जाई। लातन्हि हति हति चले पराई।।
लै त्रिसुल धावा कपि भागे। आए जहँ रामानुज आगे।।
स्रोत अभिलेख 6.76 · पुस्तक पृ. 845, 847
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तदपि न उठइ धरेन्हि कच जाई। लातन्हि हति हति चले पराई।।
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2 लै त्रिसुल धावा कपि भागे। आए जहँ रामानुज आगे।।
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स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.76
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 846
- सहायक विषय
- मेघनाद-यज्ञ-विध्वंस, युद्ध और मेघनाद-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 845, 847
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