लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आवा परम क्रोध कर मारा। गर्ज घोर रव बारहिं बारा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवह अत्यन्त क्रोधका मारा हुआ आया और बार-बार भयंकर शब्द करके गरजने लगा। मारुति (हनुमान्) और अंगद क्रोध करके दौड़े। उसने छातीमें त्रिशूल मारकर दोनोंको धरतीपर गिरा दिया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 846 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
आवा परम क्रोध कर मारा। गर्ज घोर रव बारहिं बारा।।
कोपि मरुतसुत अंगद धाए। हति त्रिसूल उर धरनि गिराए।।
स्रोत अभिलेख 6.76 · पुस्तक पृ. 845, 847
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 आवा परम क्रोध कर मारा। गर्ज घोर रव बारहिं बारा।।
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2 कोपि मरुतसुत अंगद धाए। हति त्रिसूल उर धरनि गिराए।।
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स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.76
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 846
- सहायक विषय
- मेघनाद-यज्ञ-विध्वंस, युद्ध और मेघनाद-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 845, 847
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