लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जंबुक निकर कटक्कट कट्टहिं। खाहिं हुआहिं अघाहिं दपट्टहिं।।
मूल पाठ
जंबुक निकर कटक्कट कट्टहिं। खाहिं हुआहिं अघाहिं दपट्टहिं।।
कोटिन्ह रुंड मुंड बिनु डोल्लहिं। सीस परे महि जय जय बोल्लहिं।।
स्रोत अभिलेख 6.88 · पुस्तक पृ. 860, 861
भावार्थ
मूल पाठ के बादगीदड़ोंके समूह कट-कट शब्द करते हुए मुरदोंको काटते, खाते, हुआँ-हुआँ करते और पेट भर जानेपर एक दूसरेको डाँटते हैं। करोड़ों धड़ बिना सिरके घूम रहे हैं और सिर पृथ्वीपर पड़े जय-जय बोल रहे हैं॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 861 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जंबुक निकर कटक्कट कट्टहिं। खाहिं हुआहिं अघाहिं दपट्टहिं।।
English explanation
Packs of jackals make clacking sounds; they eat, howl, become sated, and snap threateningly at one another.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जंबुक | सियारों के | of jackals |
| निकर | झुंड | packs |
| कटक्कट | कट-कट की ध्वनि | a clacking sound |
| कट्टहिं | कट-कट करते हैं | clack their jaws |
| खाहिं | खाते हैं | eat |
| हुआहिं | हुआँ-हुआँ करते हैं | howl |
| अघाहिं | तृप्त होते हैं | become sated |
| दपट्टहिं | झपटकर डराते हैं | snap at and threaten |
2 कोटिन्ह रुंड मुंड बिनु डोल्लहिं। सीस परे महि जय जय बोल्लहिं।।
English explanation
Millions upon millions of headless trunks sway; heads lying on the earth cry, ‘Victory! Victory!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोटिन्ह | करोड़ों | tens of millions |
| रुंड | धड़ | trunks of bodies |
| मुंड | सिर | heads |
| बिनु | बिना | without |
| डोल्लहिं | डोलते हैं | sway; move about |
| सीस | सिर | heads |
| परे | पड़े हुए | lying |
| महि | धरती पर | on the earth |
| जय | जय! | Victory! |
| जय | जय! | Victory! |
| बोल्लहिं | बोलते हैं | cry out |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.88
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 861
- सहायक विषय
- रावण-मूर्च्छा, रावण-यज्ञ-विध्वंस, राम-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 860, 861
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।