लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गिरिहहिं रसना संसय नाहीं। सिरन्हि समेत समर महि माहीं।।
मूल पाठ
गिरिहहिं रसना संसय नाहीं। सिरन्हि समेत समर महि माहीं।।
स्रोत अभिलेख 6.33 · पुस्तक पृ. 803, 804
भावार्थ
मूल पाठ के बादइसमें सन्देह नहीं है कि तेरी जीभें [अकेले नहीं वरं] सिरोंके साथ रणभूमिमें गिरेंगी॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 803 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 गिरिहहिं रसना संसय नाहीं। सिरन्हि समेत समर महि माहीं।।
English explanation
Without doubt, your tongues, together with your heads, will fall to the earth in battle.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गिरिहहिं | गिरेंगी | will fall |
| रसना | जिह्वाएँ | tongues |
| संसय | संदेह | doubt |
| नाहीं | नहीं है | there is none |
| सिरन्हि | सिरों के | the heads |
| समेत | सहित | together with |
| समर | युद्ध में | in battle |
| महि | पृथ्वी | earth |
| माहीं | पर | upon |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.33
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 803
- सहायक विषय
- अंगदजीका लंका जाना और रावणकी सभामें अंगद-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 803, 804
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।