लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कुंभकरन रावन द्वौ भाई। इहाँ हते सुर मुनि दुखदाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्ददेवताओं और मुनियोंको दु:ख देनेवाले कुम्भकर्ण और रावण दोनों भाई यहाँ मारे गये॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 900 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कुंभकरन रावन द्वौ भाई। इहाँ हते सुर मुनि दुखदाई।।
स्रोत अभिलेख 6.119 · पुस्तक पृ. 899, 900
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कुंभकरन रावन द्वौ भाई। इहाँ हते सुर मुनि दुखदाई।।
English explanation
The two brothers, Kumbhakarna and Ravana, who tormented gods and sages, were slain here.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुंभकरन | कुंभकर्ण | Kumbhakarna, Ravana’s brother |
| रावन | रावण | Ravana, king of Lanka |
| द्वौ | दोनों | both |
| भाई | भाई | brothers |
| इहाँ | यहाँ | here |
| हते | मारे गए | were slain |
| सुर | देवताओं को | to gods |
| मुनि | मुनियों को | to sages |
| दुखदाई | दुख देने वाले | causing suffering |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.119
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 900
- सहायक विषय
- पुष्पकविमानपर चढ़कर श्रीसीता-रामजीका अवधके लिये प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 899, 900
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।