लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कलस सहित गहि भवनु ढहावा। देखि निसाचरपति भय पावा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउन्होंने कलशसहित महलको पकड़कर ढहा दिया। यह देखकर राक्षसराज रावण डर गया। सब स्त्रियाँ हाथोंसे छाती पीटने लगीं [और कहने लगीं—] अबकी बार दो उत्पाती वानर [एक साथ] आ गये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 815 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कलस सहित गहि भवनु ढहावा। देखि निसाचरपति भय पावा।।
नारि बृंद कर पीटहिं छाती। अब दुइ कपि आए उतपाती।।
स्रोत अभिलेख 6.44 · पुस्तक पृ. 815, 815
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कलस सहित गहि भवनु ढहावा। देखि निसाचरपति भय पावा।।
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2 नारि बृंद कर पीटहिं छाती। अब दुइ कपि आए उतपाती।।
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स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.44
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 815
- सहायक विषय
- युद्धारम्भ
- मुद्रित पृष्ठ
- 815, 815
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