बालकाण्ड · दोहा 98 · दोहा
सुनि नारद के बचन तब सब कर मिटा बिषाद।
सुनि नारद के बचन तब सब कर मिटा बिषाद।
छन महुँ ब्यापेउ सकल पुर घर घर यह संबाद॥ ९८॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.98 · पुस्तक पृ. 112, 112
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सुनि नारद के बचन तब सब कर मिटा बिषाद।
तब नारद के वचन सुनकर सबका विषाद मिट गया।
English explanation
Then, hearing Narada’s words, everyone’s sorrow disappeared.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| नारद | देवर्षि नारद | Narada, the divine sage |
| के | के | ’s |
| बचन | वचन | words |
| तब | तब | then |
| सब | सबका | everyone |
| कर | का | ’s |
| मिटा | मिट गया | disappeared |
| बिषाद | दुःख और उदासी | sorrow |
2छन महुँ ब्यापेउ सकल पुर घर घर यह संबाद॥ ९८॥
क्षण भर में यह समाचार पूरे नगर में घर-घर फैल गया।
English explanation
In a moment, this news spread from house to house throughout the city.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छन | क्षण | a moment |
| महुँ | में | in |
| ब्यापेउ | फैल गया | spread |
| सकल | समस्त | entire |
| पुर | नगर में | throughout the city |
| घर | घर | house |
| घर | घर तक | to house |
| यह | यह | this |
| संबाद | समाचार | news |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा 98
- स्रोत अभिलेख
- 1.98
- सहायक विषय
- शिवजीकी विचित्र बारात और विवाहकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 112, 112
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।