बालकाण्ड · दोहा 317 · दोहा
सजि आरती अनेक बिधि मंगल सकल सँवारि।
सजि आरती अनेक बिधि मंगल सकल सँवारि।
चलीं मुदित परिछनि करन गजगामिनि बर नारि॥ ३१७॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.317 · पुस्तक पृ. 297, 298
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सजि आरती अनेक बिधि मंगल सकल सँवारि।
अनेक प्रकार से आरती सजाकर और सारी मंगल-सामग्री सँवारकर—
English explanation
Having arranged the ceremonial lights in many ways and put all the auspicious items in order—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सजि | सजाकर; तैयार करके | having arranged |
| आरती | आरती की सामग्री | the ceremonial lights and offerings |
| अनेक | अनेक | many |
| बिधि | प्रकारों से; विधियों से | in ways; by methods |
| मंगल | मंगल-सामग्री | auspicious items |
| सकल | समस्त; सारी | all |
| सँवारि | सँवारकर; व्यवस्थित करके | having put in order |
2चलीं मुदित परिछनि करन गजगामिनि बर नारि॥ ३१७॥
हाथिनी जैसी गरिमापूर्ण चाल वाली श्रेष्ठ स्त्रियाँ प्रसन्न होकर परिछन करने चलीं।
English explanation
The noble women, with the stately gait of female elephants, joyfully set out to perform the ceremonial welcome.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चलीं | चल पड़ीं | set out |
| मुदित | प्रसन्न; आनंदित | joyful |
| परिछनि | आरती आदि से मंगल स्वागत | the ceremonial welcome |
| करन | करने के लिए | to perform |
| गजगामिनि | हाथिनी जैसी गरिमामयी चाल वाली | having a stately, elephant-like gait |
| बर | श्रेष्ठ; उत्तम | noble; excellent |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा 317
- स्रोत अभिलेख
- 1.317
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 297, 298
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