बालकाण्ड · दोहा 355 · दोहा/सोरठा
लरिका श्रमित उनीद बस सयन करावहु जाइ।
लरिका श्रमित उनीद बस सयन करावहु जाइ।
अस कहि गे बिश्रामगृहँ राम चरन चितु लाइ।।355।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 1.355 · पुस्तक पृ. 335, 336
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1लरिका श्रमित उनीद बस सयन करावहु जाइ।
लड़के थके हुए हैं और नींद के वश में हैं; जाकर उन्हें सुला दो।
English explanation
The boys are tired and overcome by sleep; go and put them to bed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लरिका | लड़के, राजकुमार | the boys, the princes |
| श्रमित | थके हुए | weary |
| उनीद | नींद | sleepiness |
| बस | के वश में | overcome by |
| सयन | शयन | sleep |
| करावहु | कराओ | have them lie down |
| जाइ | जाकर | go and |
2 अस कहि गे बिश्रामगृहँ राम चरन चितु लाइ।।355।।
ऐसा कहकर राजा राम के चरणों में मन लगाए हुए विश्रामगृह में चले गए।
English explanation
Having said this, the king went to his resting chamber, keeping his mind fixed on Rama’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| गे | चले गए | went |
| बिश्रामगृहँ | विश्रामगृह में | to the resting chamber |
| राम | राम के | Rama’s |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| चितु | मन | mind |
| लाइ | लगाकर | having fixed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 355
- स्रोत अभिलेख
- 1.355
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 335, 336
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